पैटरसन (Paterson)

पैटरसन (Paterson) ( इस ब्लॉग पर पहली दफ़ा एक इंग्लिश फ़िल्म पर आलेख लिख रहा हूँ। हाँ! यह इसके उद्देश्य और तारतम्य को तोड़ता सा महसूस होता है, लेकिन इसे दर्ज करने का और कोई स्थान मेरे पास फिलहाल नहीं है इसीलिए यहीं पर जोड़ रहा हूँ। शायद बाद में इसे कहीं और स्थानांतरित कर दूँ। ) आधुनिक युग में कविता एक ऐसी कला है, जिससे आम आदमी अक्सर दूर भागता है। हिन्दी कविता के लिए तो खास तौर पर यही कहा जा सकता है कि मंचों की कविताई के अलावा , जो हास्य या बयानबाज़ी से ज्यादा कुछ खास नहीं कहती, बाकी हर तरह की कविता से आमतौर पर लोग बचते नज़र आते हैं, शायद इसीलिए क्योंकि कविता उनके लिए एक नीरस, दुर्गम या निराशा से भरी कला का रूप है। इस बात का कारण शायद यह हो सकता है कि बचपन की तुकबंदियों के बाद, कविता से जो वास्ता पड़ता है वह परीक्षा में अंक पाने के लिए हिन्दी/इंग्लिश/क्षेत्रीय भाषाओं की कविता की संदर्भ सहित व्याख्या तक ही सीमित रह जाता है। या फिर इसके आगे पढ़ने वालों के लिए छंदों के प्रकार और मात्राओं की गणना की दुरूहता से यह फ़ासला और बढ़ता जाता है। शायद इसी कारण से कविता को सार्वजनिक जीवन और लोक...